कुछ शहर अपनी इमारतों से याद रहते हैं। बनारस मुझे अपने स्वाद से याद रहता है। अगर आप इन गलियों में भूखे चलें, तो शहर आपको अपने घर के सदस्य की तरह खिलाएगा।
शुरुआत कचौड़ी-सब्ज़ी से
असली बनारसी नाश्ता है — गरम, करारी कचौड़ी, मसालेदार आलू की सब्ज़ी और एक टुकड़ा जलेबी। घाट के पास किसी भीड़ वाली दुकान पर सुबह 7 बजे खड़े होकर खाइए, समझ जाएँगे कि लोग इसकी कसम क्यों खाते हैं।
फिर आगे बढ़िए
- टमाटर चाट — बनारस की अपनी खोज, खट्टी-मीठी और अनोखी।
- बाटी-चोखा — देसी, धुएँदार और दिल को सुकून देने वाला।
- मलइयो — सिर्फ़ सर्दियों में मिलने वाला केसरिया झाग जैसा मिष्ठान, बादल जैसा हल्का।
- ठंडी लस्सी — कुल्हड़ में, गाढ़ी और मलाईदार।
अंत बनारसी पान से
बनारसी पान सिर्फ़ मुखशुद्धि नहीं, एक अच्छे भोजन का पूर्ण विराम है। नए हैं तो मीठा पान माँगिए।
नियम सीधा है — वहीं खाइए जहाँ भीड़ स्थानीय हो और सामान तेज़ी से बन रहा हो। ताज़ा और व्यस्त, महँगे और खाली से बेहतर है।
पानी साथ रखिए, ताज़ा तला हुआ खाइए, और धीरे-धीरे चखिए। बनारस का यह दावत कई दिन चलती है।