दो दिन बनारस के लिए कम हैं — पर इससे प्यार करने के लिए काफ़ी हैं। यह रही एक योजना जो ज़रूरी चीज़ों और बस बैठकर शहर को महसूस करने, दोनों में संतुलन रखती है।

पहला दिन — नदी और पुराना शहर

दूसरा दिन — शांति और संस्कृति

थोड़ा खाली समय रखिए। बनारस के सबसे अच्छे पल वही होते हैं जो योजना में नहीं होते।

अपनी नाव, दर्शन और कैब एक रात पहले बुक कर लीजिए ताकि सुबहें तनावमुक्त रहें। बाकी शहर खुद सँभाल लेगा।